सट्टा मटका गेम क्या है ।। पूरा देखो

Satta Matka Game kya hai


रतन खत्री को satta matka game के निर्माता के रूप में श्रेय दिया जाता है। कहा जाता है उन्होंने 70 के दशक में इस खेल को विकसित किया था और बना कर शुरू किया था। satta matka game 90 के दशक तक बहुत लोकप्रिय था। लेकिन धीरे-धीरे सट्टा मटका की लोकप्रियता कम हो गई। इसके कई कारण थे। लोगों के पास इसके अलावा कई विकल्प थे जहाँ वो पैसे लगा कर मुनाफा कमा सकते थे। दूसरी जगहों पर लगने वाला समय सट्टा मटका की तुलना में कम होता है। कम समय में ज्यादा मुनाफा कराने वाले खेलों की तुलना में सट्टा मटका अपनी लोकप्रियता खोता गया। इसके अलावा एक और सबसे महत्वपूर्ण बात यह भी थी कि इस खेल को भारतीय समाज के लोगों के द्वारा इसे एक बुरी आदत माना जाता था। और यह कानूनी खेल नहीं था, इसका मतलब यह खेल भारत में प्रतिबंधित/ अवैध है। कोई भी व्यक्ति सट्टा मटका नहीं खेल सकता क्योंकि भारत सरकार इसकी इजाज़त नहीं देती। अगर कोई व्यक्ति इस खेल के संचालन में लिप्त पाया जाता है तो उसपर इससे जुडी करवाई जूए के जैसे होती है। इसको जूए का ही एक प्रकार समझा जाता है।


“सट्टेबाजी” सट्टेबाजी एक तरह से ऐसा मामला है जहाँ पर सिर्फ दो चीज़ें मुमकिन है। सट्टा मटका पर या तो आप जीतते हैं या आप अपना लगाया हुआ सारा पैसा खो देते हैं। satta matka game को आमतौर पर किस्मत की गेम के रूप में जाना जाता है। एक हद तक ये बात सही भी है। लेकिन एक व्यक्ति / खिलाड़ी पुराने आंकड़ों का अच्छे से अध्ययन करके आगे आने वाले नम्बरो का पता कर सकता है। व्यक्ति के लिए गणित की अच्छी समझ व उसकी सोचने की क्षमता उसके लिए सट्टा मटका में वरदान हो सकती है। गेम जीतने के लिए और बड़ी रकम हासिल करने के लिए, खिलाड़ी को निश्चित रूप से उसके पक्ष में किस्मत की आवश्यकता होगी, लेकिन यह अकेले भाग्य नहीं है कि एक खिलाड़ी को सट्टा मटका में बड़ा मुनाफा जीता दे इसके लिए आदमी को अपने दिमाग की बराबर आवश्यकता होगी। खिलाड़ी अगर पहले से सभी पूर्व के सारे डेटा देख कर आगामी रुझानों की संख्या को तय करने में इस्तेमाल कर सकता है। एक व्यक्ति को सट्टा मटका में जीतने के लिए अपनी बुद्धि का उपयोग करना अनिवार्य है।

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